न जाने क्या क्या तोड़ा है
कसमें तोड़ी वादे तोड़े न जाने क्या क्या तोड़ा है,
जिसमें भरा भरोसा हमने तुमने वो गागर फोड़ा है!
दर्द दिया तन्हाई दी
आंसू गम रुसवाई दी
जिन आँखों को अश्क़ दिये
फिर और उन्हें गहराई दी
ढेरों ज़ख्म दिए हैं दिल पर देने को फिर क्या छोड़ा है
चैन लिया सकून भी छीना
सिसक रहा है मेरा सीना
मेरा मुझसे छीन के सब कुछ
जीवन से खुशियों को बीना
होठों से मुस्कान छीन ली लेने को फिर क्या छोड़ा है
प्यार अगर मुझसे करते थे
मुझपे ही जीते मरते थे
क्योंकर तुम उस राह चल दिए
जिन राहों से हम डरते थे
प्रिय!बताओ किसकी ख़ातिर तुमने मुझसे मुंह मोड़ा है
मुझको भी बे-नूर कर दिया
दिल को चकना-चूर कर दिया
मुझे अकेले ही रहने पर
है तुमने मजबूर कर दिया
प्यार का लेप लगाकर तुमने पीठ पे क्यों मारा कोड़ा है
सब स्वप्न अधूरे छूट गये
मुझसे अपने भी रूठ गये
तुम बात सिर्फ मुझसे करते
ये भ्रम भी सारे टूट गये
कुछ भी पास बचा न मेरे सिर्फ तुम्हरा गम थोड़ा है
यही दुआ है मेरी रब से
सारी खुशियां पाओ सब से
जिसकी ख़ातिर मुझे रुलाया
साथ रहो उसके ही अब से
पर मेरा कसूर तो कह दो क्यों गम से नाता जोड़ा है
कवि विनय आनंद
मोहम्मदी खीरी उ0प्र0
7309241250
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